उठ जाग देख नभ में प्रकाश। क्यों है निराश, मत छोड़ आस
अध्याय "जब जागो, तब सवेरा" से हमें यह शिक्षा मिलती है। यदि हमने व्यतीत समय में गलतियाँ कीं, जिससे हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल नहीं हो सके। पुरानी गलतियों को अपने मन से माफ करके तथा गलतियाँ दोबारा नहीं दोहराई जाएं। भले ही हमसे नई गलती हो जाए, वह हमें स्वीकार करनी है। सबसे पहले हमें अपने आप को चुनौती देनी है। स्वयं में परिवर्तन करके, एक सही दिशा में मेहनत करके लगातार अग्रसर, अपने कार्य को एक ईमानदारी से मेहनत करके हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। कुछ पुरानी गलतियों से सीखकर, कुछ अपने पुराने अनुभव को अपने जीवन में लागू करके, हम सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ सकते हैं। हमें अपने निर्णय से कई बार निराशा भी प्राप्त होगी। परंतु हमें पीछे नहीं हटना है। बल्कि हमें उसमें स्वयं सुधार करके आगे बढ़ना है।
नीरज कुमार आर्थर फुट अकादमी
देरी होने का ये मतलब नहीं है कि आप हार गए हैं। हो सकता है कि आप लंबी छलांग की तैयारी में हों।
जब जागो, तब सवेरा। जो बीत गया, सो बीत गया। अगर आपकी जिंदगी में आपका अतीत बहुत बुरा हो रहा है, तो उसके बारे में सोचकर आप अपना भविष्य और अपना वर्तमान खराब मत कीजिए। अतीत को लेकर अफसोस नहीं होना चाहिए, क्योंकि जो हमारा प्रेजेंट है, हम सारा फोकस उसी पर करना है। अगर हमारा प्रेजेंट अच्छा हो गया, तो आने वाला फ्यूचर भी अच्छा हो जाएगा। मैंने कहीं पर पढ़ा था कि जो आज आपका पास्ट है, वह पहले कभी प्रेजेंट था, और जो आज आपका प्रेजेंट है, वह फ्यूचर में कभी-कभी आपका पास्ट बन जाएगा। इसलिए ध्यान रखिए, अपने प्रेजेंट पर पूरा फोकस रखिए। अगर प्रेजेंट अच्छा हो गया, तो आपके व्रत में गलतियां छुप जाएंगी। प्रेजेंट अच्छा होगा, और आपका भविष्य बहुत अच्छा होगा ।
देवानंद आर्थर फुट अकादमी
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