चिंतन एवं आत्ममंथन- तारा वेस्टओवर की पुस्तक Educated का छठा अध्याय हमें यह सोचने पर विवश करता है कि शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी या पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के अनुभव भी हमारे सबसे बड़े शिक्षक होते हैं। तारा के जीवन में पारिवारिक मान्यताओं और आधुनिक शिक्षा के बीच दिखाई देने वाला संघर्ष हमें सिखाता है कि जिज्ञासा और सीखने की इच्छा कभी समाप्त नहीं होती।
मैं अपना एक प्रत्यक्ष अनुभव साझा करना चाहूँगी। एक दिन विद्यालय में मैंने देखा कि एक बच्चा पुस्तक पढ़ने के बजाय अपने सहपाठियों से बातचीत करने में अधिक रुचि ले रहा था। जब मैंने उसे कहानी की पुस्तक पढ़ने के लिए कहा, तो शुरुआत में वह थोड़ा उदास हो गया। लेकिन जब उसी कहानी को रोचक आवाज़ों और पात्रों के माध्यम से पढ़कर सुनाया गया, तो उसकी उत्सुकता बढ़ गई। धीरे-धीरे उसने स्वयं पुस्तक पढ़ने और कहानी सुनाने में रुचि दिखानी शुरू कर दी।
उस दिन मुझे महसूस हुआ कि बच्चों में पढ़ने की रुचि समाप्त नहीं हुई है, बल्कि हमें उसे जागृत करने के नए तरीके खोजने होंगे।
आज डिजिटल तकनीक हमारे लिए ज्ञान का एक बड़ा माध्यम है, जबकि पुस्तकें हमें गहराई से सोचने, कल्पना करने और धैर्यपूर्वक सीखने की आदत डालती हैं।
एक शिक्षक के रूप में मैं अपने विद्यालय में प्रतिदिन कुछ मिनट पुस्तक पठन के लिए निर्धारित करूँगी, बच्चों को पुस्तकालय की पुस्तकों से जोड़ूँगी तथा डिजिटल साधनों का प्रयोग सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाने के लिए करूँगी।
क्योंकि तकनीक हमें ज्ञान तक पहुँचने का रास्ता दिखाती है, पुस्तकें हमें सोचने की दृष्टि देती हैं और जीवन के अनुभव उस ज्ञान को समझने की शक्ति प्रदान करते हैं।
गुलाबी
सनबीम ग्रामीण स्कूल
